स्वस्थ बहस जरूर छेड़ें लेकिन, कटुता से बचना होगा

बॉलीवुड सिंगर सोनू निगम द्वारा अजान के लिए लाउड स्पीकर के इस्तेमाल पर सवाल उठाने के बाद से देश में बहस-सी छिड़ गई है। मुस्लिम नेता और पश्चिम बंगाल अल्पसंख्यक यूनाइटेड काउंसिल के उपाध्यक्ष सैयद शाह आतेफ अली कादरी ने सोनू निगम के खिलाफ फतवा जारी किया। सोनू ने अपने ट्वीट पर नाराज होने वाले उन सब लोगों पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘कैसे कथित समझदार लोग किसी भी बात का पूरी तरह अर्थ बदल देते हैं। कमेंट अजान या आरती के बारे में नहीं था बल्कि मंदिरों और मस्जिदों में लाउड स्पीकर के इस्तेमाल के बारे में है।’
सोनू निगम को लाउड स्पीकर पर आपत्ति थी लेकिन, आक्रोश अजान पर निकल गया। उससे लोगों का गुस्सा होना सही है। जिस देश में अनेक धर्मों के लोग रहते हों वहां एेसा सोचना भी गलत है, जिससे किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे। देश के संविधान के मुताबिक सभी धर्मों के लोगों का आदर करना ही सही इंसान की पहचान है। कई बार लोग अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए बिना सोचे कुछ भी कह देते हैं, जिससे जनता में आक्रोश बढ़ता है। सही मायने में आज समय सर्वधर्म समभाव से देश जोड़ने का है- ‘एक रफी था महफिल महफिल ‘रघुपतिराघव’ गाता था/ एक प्रेमचंद बच्चों को ‘ईदगाह’ सुनाता था/ कभी ‘कन्हैया’ की महिमा गाता ‘रसखान’ सुनाई देता है।’
देश को विभाजित करने वाले लोगों से निपटने के लिए धर्मनिरपेक्षता नाम का मानसिक कवच पहनने की ज़रूरत है ताकि देश का माहौल बिगाड़ने में लगे लोगों का प्रतिकार किया जा सके। विभिन्न सामाजिक मुद्‌दों पर बहस तो होनी चाहिए लेकिन, उसमें कटुता न फैले इसका ध्यान रखना जरूरी है। समय है एकजुट होकर आतंकवाद, बेरोजगारी और कुरीतियों के खिलाफ लड़ने का। संविधान से ऊपर इस देश में कुछ भी नहीं है, जहां सभी को समान अधिकार प्राप्त है लेकिन, आजकल देश में जिस प्रकार का माहौल बन रहा है उसके परिणाम भयावह हो सकते हैं।अमन शर्मा, 25
एलुमनाई वेल्लौर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, प्रोजेक्ट एलुमनाई आईआईएससी, बेंगलुरू
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