दुनिया के लिए मानव संसाधन का गढ़ बन सकता है देश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर युवा आबादी को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए वरदान कहते रहे हैं, परंतु देश युवा आबादी का लाभ तभी ले सकता हैं, जब युवाओं की शिक्षा तथा उनके कौशल विकास में निवेश हो। अभी तो कौशल विकास पर समुचित ध्यान नहीं होने की वजह से बेरोजगार युवाओं की फौज खड़ी हो रही हैं, श्रम ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार भारत में महज 3.5 फीसदी कुशल कार्यबल है।
आज भारत की 65 फीसदी आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक 2020 तक भारत की औसत आयु 29 वर्ष होगी, जबकि चीन व अमेरिका में 37 वर्ष तथा यूरोप में 45 वर्ष होगी। ऐसे में भारत बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे युवा आबादी वाला देश है। यह भारत के लिए बेहतर अवसर भी है और बड़ी चुनौती भी। अवसर इस मायने में कि हम युवाओं को हुनरमंद बनाकर देश को विश्व के मानव संसाधन के गढ़ में तब्दील कर सकते हंै। आज कई विकसित देशों की आबादी बूढ़ी होती जा रही है तथा वहां श्रम शक्ति की भारी मांग होगी।भारत की 80 करोड़ से ज्यादा आबादी कामकाजी आयु की है तथा हर साल काम करने की वाली आबादी में 6 करोड़ नए युवा शामिल हो रहे है। किंतु समस्या यह है कि भारत में शिक्षा प्रणाली दोषपूर्ण है। एक रिपोर्ट के अनुसार देश के 90 फीसदी स्नातक, 75 फीसदी इंजीनियरिंग स्नातक तथा 80 फीसदी मैनेजमेंट पोस्टग्रेजुएट नौकरी देने के लायक नहीं है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि इनमें 50 फीसदी ऐसे युवा है,जिन्हें आवश्यक प्रशिक्षण देने के बावजूद अच्छी नौकरी पर नहीं रखा जा सकता। जाहिर है हमारी शिक्षा की गुणवत्ता बहुत खराब है।युवाओं को हुनरमंद बनाने के लिए शिक्षा का व्यवसायीकरण समय की मांग हैं। सरकार वर्ष 2022 तक 40 करोड़ युवाओं को हुनरमंद बनाने के लिए स्किल इंडिया कार्यक्रम चला रही हैं। युवाओं में इस कार्यक्रम के प्रति जागरूकता बढ़ाकर तथा सरकारी मशीनरी को चुस्त-दुरुस्त करके स्किल इंडिया मुहिम को आंदोलन का रूप देने की जरूरत है, ताकि कुशल भारत, खुशहाल भारत के सपने को चरितार्थ किया जा सके।कैलाश बिश्नोई, 24
दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
Facebook /Kailash.manju.75
It takes only 5 seconds to share, If you care plz plz share, It help us to grow.

Advertisement

 

Top News