कर्ज माफी का विकल्प है बुनियादी समस्याओं का हल

पिछले दिनों तमिलनाडु से आए 170 सूखा पीड़ित किसान आत्महत्या करने वाले किसान साथियों के नरकंकालों के साथ जंतर-मंतर पर अनिश्चित हड़ताल पर रहे। मुद्‌दा था प्रति एकड़ मिलने वाली सूखा राहत की राशि का अपर्याप्त होना। उधर उत्तरप्रदेश के नव-निर्वाचित मुख्यमंत्री ने चुनाव घोषणा-पत्र के तहत किसानों के एक लाख तक के कर्ज माफ कर दिए हैं, जिसका फायदा 94 लाख छोटे और सीमांत किसानों को मिलेगा।
बीते वर्षों में किसानों की कर्ज माफी चुनावी मुद्‌दा बन गया। तमिलनाडु में एआईएडीएमके सरकार बनने पर 5,780 करोड़ रुपए की कर्ज माफी की गई। पंजाब के चुनाव में भी इसका वादा था। उत्तर प्रदेश में कर्ज माफी के बाद महाराष्ट्र में यह मुद्‌दा तूल पकड़ रहा है। इसमें दो राय नहीं कि कर्ज माफी से किसानों को राहत मिलती है पर क्या इससे बेहतर विकल्प भी हैं? जहां तक कर्ज माफी के आर्थिक पक्ष का सवाल है तो भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने इसे देश की मौद्रिक नीति के लिए सही नहीं माना है। इससे लोगों में कर्ज अदायगी न करने की आदत को बढ़ावा मिलता है। ऐसे में कुछ मुद्‌दों पर खास जोर देने की जरूरत है। जैसे न्यूनतम समर्थन मूल्य।पिछले दिनों आलू को उचित मूल्य नहीं मिल पाया तो उड़ीसा के टमाटर के किसानों का यही हाल था। जाहिर है न्यूनतम समर्थन मूल्य की नीति को व्यापक आयाम देना होगा। कृषि उत्पादों में वायदा कारोबार को प्रोत्साहन देना होगा। गन्ना किसानों को जल्द से जल्द से भुगतान कराना होगा। बांधों, भूमिगत जल व अन्य जल स्रोतों का घटता स्तर चिंता की बात है। पानी की समूचित व्यवस्था, उन्नत बीज, मिट्‌टी की जांच, ड्रिप सिंचाई तकनीक, कृषि आधारभूत संरचना और बीटी फसलों से जुड़े मुद्‌दों पर बहुत काम करना बाकी है।ऐसे में कर्ज माफी किसानों के लिए तत्काल राहत देने का विकल्प हो सकता है पर किसानों की बुनियादी समस्याओं का निदान ही तार्किक विकल्प है। किसानों के लिए खेती मुनाफे का पेशा बनाना होगा और किसान की आमदनी बढ़ानी होगी। प्रधानमंत्री ने किसानों की आय को दोगुना करने का संकल्प लिया है पर उस दिशा में कोई ठोस कदम दिखाई नहीं देता।अमरजीत कुमार, 28
कॉर्पोरेट लॉयर
पीजी, सोशोलॉजी, इग्नू, नई दिल्ली
amarjeetkumar313@gmail.com
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