‘लाल रेखाएं पार करने’ पर असद को ट्रम्प की चेेतावनी

शुक्रवार को अल सुबह जब मैं असद पर हमला करने के मुद्‌दे पर हिलेरी क्लिंटन को ट्रम्प प्रशासन को चुनौती देते हुए सुनते-सुनते नींद के आगोश में जा रहा था, तो उस कवरेज में व्यवधान आ गया। फिर खबर आई कि राष्ट्रपति ने भूमध्य सागर से टॉमहाक-59 मिसाइल सीरिया के शरयत विमानतल को निशाना बनाने के लिए अधिकृत की है। यहीं से कुछ दिन पूर्व असद की फौज ने खौफनाक रासायनिक हमला किया था।
पूर्ववर्ती प्रशासन की नीति से यह एकदम अतिवादी नीति थी, क्योंकि बराक ओबामा ने 2013 में सीरिया में हस्तक्षेप न करके असद पर रासायनिक हथियार त्यागने का दबाव बनाने के लिए कूटनीतिक साधनों का इस्तेमाल करने की बुद्धिमत्तापूर्ण नीति अपनाई थी। डोनाल्ड ट्रम्प भी उन लोगों में थे, जिन्होंने राष्ट्रपति ओबामा को हमले करने से हतोत्साहित किया था। हालांकि, ट्रम्प ने यह जताया था कि वे असद या सीरिया के रुख के विपरीत नहीं हैं। कुछ दिन पहले संयुक्त राष्ट्र में उनकी दूत निक्की हैली ने कहा कि दमिष्क से असद को बेदखल करना ट्रम्प प्रशासन की प्राथमिकता नहीं है लेकिन, अब ट्रम्प ने उलटा कदम ही उठा लिया है। उन्होंने तत्काल असद की भर्त्सना करते हुए कहा कि उन्होंने ‘कई लाल रेखाएं’ पार कर ली हैं। हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना होगा कि यह कम जोखिम का प्रयास है, क्योंकि ये मिसाइलें मानवरहित इस्तेमाल होती हैं और इसलिए किसी अमेरिकी की जान जोखिम में नहीं पड़ती। फिर इसका आशय इतना ही था कि असद को मालूम पड़ जाए कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका उचित जवाब देने को तैयार है।
हालांकि, इस प्रतिक्रिया में जटिलताएं तब पैदा होंगी,जब क्रेमलिन और दमिष्क इस चुनौती का जवाब देंगे। पुतिन ने सीरिया की सम्प्रभुता का उल्लंघन करने के लिए अमेरिका की निंदा की है और सीरिया की हवाई रक्षा को मजबूत बनाकर प्रतिक्रिया दी है। चिंता ईरान की संभावित प्रतिक्रिया की भी है, जो तनाव को और बढ़ा देगी। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस ताजा घटनाक्रम के क्या नतीजे होंगे। अभी यही कहना ठीक है कि यह पीठ पर धौल जमाने की बजाय कंधे पर दी गई थाप ज्यादा है।अभिषेक रखेजा, 20
एडिनबरा यूनिवर्सिटी, यूके
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