मेडिकल डिवाइस की वैश्विक राजधानी को टैक्स का झटका

‘उत्तरी अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते’ ने मैक्सिको के अमेरिकी सीमा से लगे तिजुआना शहर को छोटी-मोटी पार्टियों के स्पॉट से बदलकर ‘मेडिकल डिवाइस की वैश्विक राजधानी’ बना दिया है। दोनों तरफ फैक्ट्रियों से पटे पड़े राजमार्ग ट्रकों से जाम रहते हैं। उन पर मेडट्रॉनिक, हिल रोम, डीजीओ ग्लोबल और ग्रेटबैच मेडिकल जैसी अमेरिकियों की कंपनियों के लेबल होते हैं। वहां मैक्सिकन कर्मचारी हर रोज वैश्विक बाजार के लिए लाखों मेडिकल डिवाइस बनाकर बाहर निकाल देते हैं। दुनियाभर में जो भी पेसमेकर इस्तेमाल होते हैं, उनमें यही बने हिस्से-पुर्जे होते हैं।
मैन्युफैक्चरिंग जॉब अमेरिका लाने के चक्कर में डोनाल्ड ट्रम्प आयात शुल्क बहुत बढ़ाने वाले हैं, जबकि अमेरिका जरूरत के 30 फीसदी मेडिकल डिवाइस यहीं से आयात करता है। समस्या यह है कि ये उत्पादन अमेरिका ले जाना बहुत कठिन है, क्योंकि अंतत: मानव शरीर में जाने वाले ये उपकरण सुरक्षित हैं या नहीं, यह तय करने के लिए बहुत कड़े नियम हैं और अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडिमिस्ट्रेशन व अन्य निरीक्षण एजेंसियों से मंजूरी की लंबी प्रक्रिया का पालन करना होता है। वह चीन, यूरोप, मैक्सिको और अन्य जगहों पर सैकड़ों मेडिकल डिवाइस उत्पादकों का निरीक्षण कर उन्हें प्रमाण-पत्र देता है। मामूली से मैन्युफैक्चरिंग चेन्ज में महीनों लग जाते हैं। एेसे में मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी अमेरिका लाना कितना कठिन है, समझा जा सकता है।यदि कंपनियां वहीं उत्पादन रखती हैं तो आयात शुल्क से लागत बढ़ जाएगी, जिससे न सिर्फ इस उद्योग को झटका लगेगा बल्कि अमेरिका में हेल्थकेयर भी प्रभावित होगा। इसलिए कम से कम अभी यही दिखता है कि तिजुआना में मेडिकल फैक्ट्रियां बरसों बनी रहेंगी।
शिकागो में कुक काउंटी हैल्थ एंड हॉस्पिटल सिस्टम के सीईओ डॉ. जॉन जे शैनन कहते हैं- ‘असली खतरा मेडिकल डिवाइस की सप्लाई ठप होने का है।’ अमेरिकी अस्पताल बैंडेज व सर्जिकल दस्तानों के लिए चीन, टांके लगाने की सुइयों व आर्टिफिशियल ज्वॉइंट के लिए आयरलैंड और डिफाइब्रिलेटर और कैथेटर्स के लिए मैक्सिको पर निर्भर हैं।ट्रम्प की दलील है कि बॉर्डर टैक्स अच्छे वेतन वाली नौकरियां अमेरिका में ही बनाए रखने के लिए जरूरी है ताकि अमेरिकी कंपनियों को मैक्सिकन वर्कर पर निर्भर रहने से रोका जा सके। बैजा कैलिफोर्निया मेडिकल डिवाइस क्लस्टर के उपाध्यक्ष मिगुएल फेलिक्स डियाज बताते हैं कि यदि अमेरिका बॉर्डर टैक्स लगाता है तो इसे भुगतने वाला अंतिम व्यक्ति अमेरिकी उपभोक्ता ही होगा।
मैक्सिकन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री ज्यादातर कच्चा माल व मशीनरी अमेरिकी सप्लायरों से ही खरीदती है। यदि मैक्सिको ने भी बदले की कार्रवाई में बॉर्डर टैक्स लगा दिया तो कंपनियों को सप्लाई के लिए चीन जैसे देशों की ओर जाना होगा पर चीन अमेरिका से सिर्फ 4 फीसदी कच्चा माल मंगवाता है जबकि मैक्सिको 40 से ज्यादा कच्चा माल अमेरिका से आयात करता है।वुड्रो विल्सन इंटरनेशनल सेंटर फॉर स्कॉलर्स के मैक्सिको इंस्टीट्यूट के डेप्यूटी डायरेक्टर क्रिस्टोफर विल्सन कहते हैं, ‘नुकसान सिर्फ मैक्सिको में काम कर रही अमेरिकी कंपनियों को ही नहीं होगा, अमेरिकी सप्लायरों को
भी होगा।’© The New York Times
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