खतरे में हैं मैन्युफैक्चरिंग हब वाले चीन के तटीय शहर

दक्षिण चीन की पर्ल नदी का नाम जितना सुंदर है, उतनी ही सुंदर इमारतें पिछले दो दशकों में उसके आसपास बनी हैं। बड़ी नदियों में प्रमुख पर्ल नदी की कुल लंबाई 2,400 किलोमीटर है और बेसिन क्षेत्रफल 4 लाख 53 हजार 700 वर्ग किलोमीटर है। यही नदी दक्षिण चीन सागर में मिलती है।
पिछले तीन सालों में लगातार पर्ल नदी के डेल्टा क्षेत्र में भयावह बाढ़ आई है। बारिश के मौसम में ही नहीं, बिना बारिश के भी इमारतों की एक-एक मंजिल तक पानी भरा था। किसी को नहीं पता कि ऐसा क्यों हुआ। बारिश के मौसम में कुछ ही घंटे में मॉल और इमारतों की तल मंजिलों का डूबना दोंगगुआन जैसे शहरों के लिए चिंता का विषय है।दोंगगुआन वह शहर है, जो दुनिया के ‘डायनॉमिक इंडस्ट्रियल शहरों’ में शामिल है। ऐसा शहर जो मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर स्थापित किया गया है। मई 2014 में वहां 100 से अधिक फैक्टरियां जलमग्न हुई थीं। 20 मिनट में पानी घुटनों से ऊपर तक बढ़ गया था। दर्जनों बिज़नेस प्रभावित हुए थे। उसका एक ही बड़ा कारण है- पूरा शहर पर्ल नदी के डेल्टा पर बसा है। दूसरा शहर गुआंगझू है, जो पोर्ट सिटी के लिए जाना जाता है। सवा करोड़ से अधिक आबादी वाले उस शहर में उन्हीं दिनों में 80 नावें और दर्जनों हेलिकॉफ्टर राहत कार्य में लगाए गए थे। एक लाख से ज्यादा लोग अपने घर खो चुके थे ।
चेन रोन्गबो उसी शहर में रहते थे। वे बाढ़ से बचने के लिए 6 वर्षीय पोते को उठाकर दूसरी मंजिल पर जा रहे थे, लेकिन स्लिप हो गए। अंतत: दोनों बाढ़ में बह गए थे। पेंग नाम का एक व्यक्ति रातो-रात सेलिब्रिटी बन गया था, क्योंकि छाते में मछली पकड़ने वाला उसका फोटो चैनलों पर दिखाया गया था। पर्ल नदी के डेल्टा क्षेत्र में पिछले तीन-चार वर्षों में हालात तेजी से भयावह होने लगे हैं।‘मई 2014’ की बारिश ने दुनियाभर के वैज्ञानिकों को सोचने पर मजबूर कर दिया था कि क्या क्लाइमेट चेंज का असर इतना भयावह हो सकता है? क्या नदियों के पास बसे शहर जलमग्न हो सकते हैं? एक पीढ़ी पहले तक पर्ल नदी का डेल्टा पूरी तरह कृषि क्षेत्र था। तीन बड़ी नदियों में मकड़ी के जाल की तरह सैकड़ों छोटी नदियां मिलकर डेल्टा क्षेत्र बनाती थी, जिसका लाभ दूर तक फैले चावल के खेतों को मिलता था। गुआंगझू की पहचान उसी से थी, लेकिन वर्ष 1980 के दशक में इस क्षेत्र का नक्शा बदलने लगा। बीजिंग स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एंड एन्वायर्नमेंटल अफेयर संस्थान के डायरेक्टर मा जुन कहते हैं कि चीन में क्लाइमेट चेंज का असर दिखने लगा है। राजधानी बीजिंग इसका बड़ा उदाहरण है।
कई ऐसे शहर, जहां औद्योगिकरण है, वहां असर शुरू हो चुका है। दूसरे शब्दों में कहें तो क्लाइमेंट चेंज के असर की गति आपके-हमारे सोचने से कहीं अधिक है। समुद्र का जलस्तर जिस गति से बढ़ रहा है, उसे कोई आसानी से नहीं परख सकता। गर्मियों में तूफान कब आ जाए, आप सोच भी नहीं सकते। मा जुन कहते हैं- इस विषय पर कोई बात करना नहीं चाहता। ऐसा लगता है जैसे तबाही से ध्यान हटाकर लोग बिज़नेस पर ही बात करना चाहते हैं।आर्किटेक्ट और प्रोफेसर झाउ जियानचुन कहते हैं कि शहरों में सब बड़ा-बड़ा दिखाया जा रहा है, जिसे मॉडर्न कहते हैं। जबकि वास्तविक जरूरतों को नजरअंदाज किया जा रहा है। पूरे दक्षिण चीन का भविष्य मौसम पर निर्भर है। अफसरों ने भी प्रगति के नए पैमाने बना लिए हैं। लेकिन, लोग वायु प्रदूषण के प्रति चिंतित हैं। गुआंगदोंग शहर में कुछ फैक्टरियां इसीलिए बंद हो गईं। प्रदूषण के कारण मैन्युफैक्चरिंग उद्योग चीन से वियतनाम और कंबोडिया शिफ्ट हो रह हैं, वहां सख्त नियम नहीं हैं। वो देश गलतियां करेंगे, तो खामियाजा चीन को ही भुगतना है, इसलिए चीन ने अब ग्रीन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देना शुरू किया है।
ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ साउथेम्पटन में कोस्टल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर रॉबर्ट जे निकोल्स ने वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट तैयार करने में सहयोग किया है। उनके अनुसार वहां आपदा कभी भी आ सकती है, ऐसा लगता है जैसे चीनी लोग कैटरीना तूफान जैसी स्थिति लाना चाहते हैं, जिसने वर्ष 2005 में अमेरिका के न्यू ऑर्लियन्स को तबाह किया था। वर्ष 2016 में चीन में औसत से 16 फीसदी अधिक बारिश हुई थी, जो इतिहास में सर्वाधिक थी। इसलिए चीन के तटीय शहरों को खुद को बचाने के लिए कुछ नया और जल्दी करना होगा, नहीं तो वह आपदा कितना नुकसान पहुंचाएगी, यह कोई नहीं जानता न ही उसकी कल्पना कर सकता है।ट्रिलियन डॉलर का प्रश्न
- वर्ल्ड बैंक के अनुसार ट्रिलियन डॉलर का प्रश्न यह है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने की स्थिति में दुनियाभर के तटीय शहरों को बचाने का कौन-सा प्रोजेक्ट तैयार है। इसका उत्तर किसी के पास नहीं है। चीन हर साल जीडीपी का 1.4 फीसदी हिस्सा खो रहा है। उसका बड़ा कारण यह है कि वहां के शहरों में जरूरत से ज्यादा निर्माण हो रहे हैं।
- गुआंगझू शहर की नहरें कभी बाढ़ के लिए काफी थीं, लेकिन वहां भी मकान बन गए हैं।
- सबसे ज्यादा खरबपतियों वाले राज्य गुआंगदोंग में लाखों कर्मचारी दूसरे राज्यों से आए हैं। वहां घरों की किल्लत ऐसी है, जैसे चुनिंदा रईसों ने पहले ही सारे खरीद लिए हों।
- शेनझेन शहर में अर्बन प्लानर झाउ मिंग कहते हैं कि इस बदलाव के पहले लोगों के पास खाने के लिए भोजन नहीं था। उनका फोकस जॉब और जरूरतों पर था।- माइकल किमलमैन, अर्बन व हाउसिंग के विशेषज्ञ व आलोचक
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